सचिव की कलम से……..
सन् 1959 से लेकर 2024 तक तमाम उतार-चढ़ावों के रास्ते से गुजर कर संस्था ने जो ऊँचाई हासिल की है वह बेहद सुखद एवं संतोष का विषय है। लेकिन अभी कई मंजिलें हैं, जिन्हें पाना है। अब तक जो कुछ हासिल हुआ है, वह निश्चय ही महाविद्यालय से जुड़े सभी लोग के श्रम का ही फल है। मैं सभी के प्रति कृतज्ञ हूँ। जो अमोला 1959 में रोपा गया था, वह आज वृक्ष बन चुका है, यह सच्चाई है। लेकिन समय के साथ चुनौतियाँ भी नई हैं। ऐसे में ईमानदार, सक्रिय और सार्थक कोशिश इन चुनौतियों के जूझने का सबसे बढ़िया हथियार है, ऐसा मेरा विश्वास है ।
नितिन भटनागर
सचिव
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